May 18, 2024 9:41 pm

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मौसम की अपडेट:फरवरी में गर्मी, प्री मॉनसून बारिश… आखिर मौसम में क्यों रहा इतना बदलाव, जानिए क्या कहते हैं – मौसम वैज्ञानिक

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BAHUJAN NEWS DESK

लखनऊ। रविवार को कानपुर के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ0एस0एन सुनील पाण्डेय ने मौसम की जानकारी देते हुए बताया की इस साल फरवरी महीने में ही गर्मियों का अहसास होने लगा। ज्यादातर राज्यों में फिलहात तेज धूप और पसीना छुड़ाने वाली गर्मी पड़ रही है। आमतौर पर गर्मियां मार्च के बाद ही शुरू होती थीं। लेकिन मौसम में हुए इस बदलाव से भारत के पांच राज्यों की फसलों पर खतरा बढ़ गया है।

पहले फरवरी में ही गर्मी आ गई, अब प्री-मॉनसून सीजन की बारिश, आंधी और ओलों का सीजन जल्दी शुरू हो गया है। इसकी वजह से भारत के पांच राज्यों की फसलों पर खतरा बढ़ गया है। एक्सपर्ट के अनुसार, मौसम में हो रहे यह परिवर्तन सीधे तौर पर बढ़ते वैश्विक तापमान से जुड़े हैं। मार्च के पहले ही हफ्ते में प्री-मॉनसूनी गतिविधियां शुरू हो गई हैं। बारिश और आंधी आ रही हैं। मार्च में 6 से 8 तारीख तक बेमौसमी बारिश की वजह से राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में फसलें बर्बाद हुई हैं। तेज हवाओं और ओलों की वजह से फसलें जमीन पर लेट गई हैं।

13 से 18 मार्च तक कई प्रदेशों में होगा मौसम खराब

अब एक बार फिर से देश के कई हिस्सों में प्री मॉनसून सीजन की बारिश, आंधी, ओले और बिजली की घटनाएं होंगी। इसकी वजह से फसलों को काफी नुकसान हो सकता है। 13 से 18 मार्च तक कई प्रदेशों में मौसम खराब होगा। मैदानी इलाकों, दक्षिणी मध्य प्रदेश, विदर्भ, मराठवाड़ा, तेलंगाना आंध्र प्रदेश और उत्तरी कर्नाटक पर इसका असर पड़ेगा। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में 15 से 16 मार्च के बीच ओले भी गिरेंगे और यह काफी अधिक होंगे। मौसम विज्ञानी के अनुसार इस साल देश में सर्दियां पहले ही गर्म रही हैं। दिसंबर और फरवरी 1901 के बाद सबसे गर्म रहे हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

सीएसएसए युनिवर्सिटी के कृषि मौसम वैज्ञानिक डा०यस०यन०सुनील का कहना है कि इस साल यह गतिविधियां जल्दी शुरू हो गई है। आमतौर पर प्री मॉनसून सीजन की गतिविधियां मार्च मध्य के बाद शुरू होती हैं। वहीं इस सीजन में होने वाली गतिविधियां आमतौर पर सुबह व शाम के समय होती है। लेकिन इस बार यह काफी लंबी हो रही है। अधिक तपमान की वजह से इस साल कई मौसमी सिस्टम सक्रीय हो रहे हैं। डा०पांडेय के अनुसार बढ़ते वैश्विक तापमान और जलवायु परिवर्तन की वजह से तीव्र मौसमी घटनाओं की तीव्रता बढ़ रही है।

वहीं, सामान्य तौर पर हर तीन से पांच साल बाद होने वाली एल नीनो घटना इस साल भारत के मौसम को प्रभावित कर सकती है, जिससे कृषि क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। एक कृषि वैज्ञानिक ने कहा, अल नीनो घटना से मानसून की बारिश सबसे अधिक प्रभावित होती है। और चूंकि बारिश कृषि गतिविधियों के लिए आवश्यक है, अल नीनो भारत के लिए चिंता का कारण बन सकता है।

वहीं, सामान्य तौर पर हर तीन से पांच साल बाद होने वाली एल नीनो घटना इस साल भारत के मौसम को प्रभावित कर सकती है, जिससे कृषि क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। कृषि मौसम वैज्ञानिक ने बताया, अल नीनो घटना से मानसून की बारिश सबसे अधिक प्रभावित होती है। और चूंकि बारिश कृषि गतिविधियों के लिए आवश्यक है, अल नीनो भारत के लिए चिंता का कारण बन सकता है।

रिपोर्ट-मदन सिंह

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